इंद्रधनुष कैसे और क्यों बनता है? इंद्रधनुष के रंग और दिशा | IndraDhanush Kaise Banta Hai.

दोस्तों बरसात के दिनों में आकाश में किसी ना किसी दिन हमें इंद्रधनुष दिखाई देता है, लेकिन क्या आप जानते हैं बरसात के मौसम में इंद्रधनुष क्यों बन जाता है, इंद्रधनुष बनने के पीछे वजह क्या है| आज के आर्टिकल में हम इंद्रधनुष के बारे में ही जानेंगे, कि इंद्रधनुष क्या होता है, IndraDhanush Kaise Banta Hai. इंद्रधनुष कितने प्रकार का होता है आदि| इसलिए इंद्रधनुष से संबंधित सभी जानकारी पाने के लिए इस आर्टिकल को ध्यान पूर्वक पूरा पढ़िएगा| 

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इंद्रधनुष किसे कहते है?| IndraDhanush Kaise Banta Hai.

बरसात के मौसम में वायुमंडल में मौजूद वर्षा की बूंदों में सूर्य के प्रकाश की वजह से सात रंगों का एक स्ट्रक्चर वृत्ताकार आकृति बन जाती है, जिसे इंद्रधनुष कहा जाता है| सूर्य के प्रकाश का पानी की बूंद में अपवर्तन, वर्ण विक्षेपण, पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण इंद्रधनुष बनता है| 

इंद्रधनुष में कितने रंग होते हैं?

इंद्रधनुष में मुख्य रूप से सात रंग होते हैं, सात रंग : बैगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल| इंद्रधनुष के इन सात रंगों को याद रखने के लिए एक शब्द – बैजानीहपीनाला बनाया गया है| 

  • बै बैगनी
  • जा जामुनी
  • नी नीला
  • ह हरा
  • पी पीला
  • ना नारंगी
  • ला लाल 

इंद्रधनुष के प्रकार

बरसात के मौसम में आकाश में जो इंद्रधनुष दिखाई देता है, वह मुख्यतः दो प्रकार का होता है| १.प्राथमिक इंद्रधनुष २.द्वितियक इंद्रधनुष

प्राथमिक इंद्रधनुष

सूर्य के प्रकाश का वर्षा की बूंद में अपवर्तन, पूर्ण आंतरिक परावर्तन तथा पुनरावर्तन की वजह से प्राथमिक इंद्रधनुष का निर्माण होता है| प्राथमिक इंद्रधनुष में जब सूर्य का प्रकाश वर्षा की बूंद से होते हुए बाहर निकलता है| तो ऐसी स्थिति में प्राथमिक स्थिति से 40 डिग्री कोण पर बैगनी रंग तथा 42 डिग्री कोण पर लाल रंग विक्षेपित होते हैं| जबकि बाकी रंग इन दोनों के मध्य में होते हैं| इस प्रकार से प्राथमिक इंद्रधनुष में बैगनी रंग सबसे नीचे तथा लाल रंग सबसे ऊपर दिखाई देता है|

द्वितीयक इंद्रधनुष 

सूर्य की प्रकाश का वर्षा की बूंद में दो बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण द्वितीयक इंद्रधनुष का निर्माण होता है| दो बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण इसे द्वितीय इंद्रधनुष कहते हैं| प्राथमिक इंद्रधनुष की तुलना में द्वितीयक इंद्रधनुष थोड़ा सा धुंधला दिखाई देता है| द्वितीयक इंद्रधनुष में सभी रंगों का क्रम प्राथमिक इंद्रधनुष के विपरीत होता है| यानि द्वितीयक इंद्रधनुष में सबसे नीचे लाल रंग तथा सबसे ऊपर बैगनी रंग होता है| 

इंद्रधनुष कब और कैसे बनता है | IndraDhanush Kaise Banta Hai.

दोस्तों जैसा कि ऊपर हमने आर्टिकल में आपको बताया कि इंद्रधनुष का निर्माण सूर्य के प्रकाश का वर्षा की बूंद से अपवर्तन, वर्ण विक्षेपण तथा पूर्ण आंतरिक परावर्तन की घटना की वजह से होता है| वायुमंडल में वर्षा की बूंदों पर जब सूर्य से आने वाली समांतर किरणें पड़ती हैं, तो ऐसी स्थिति में वर्षा की बूंदों से प्रकाश की किरणों के अपवर्तन तथा पूर्ण आंतरिक परावर्तन से वर्ण विक्षेपण उत्पन्न हो जाता है| 

वर्ण विक्षेपण उत्पन्न होने की वजह से वर्षा की बूंदों से भिन्न-भिन्न रंग की किरणें अलग-अलग दिशाओं में निकलने लगती है| लेकिन सूर्य के प्रकाश की अधिकांश रंगीन किरणें न्यूनतम विचरण की दिशा में निकलती है, और इस दिशा में रंग की तीव्रता बहुत अधिक होती है| इस प्रकार से एक वर्षा की बूंद से केवल एक रंग न्यूनतम विचरण की दिशा में निकलती हुई दिखाई देती है| और हमें सभी रंगों को देखने के लिए अनेक वर्षा की बूंदों की आवश्यकता होती है| एक वर्षा की बूंद से एक रंग निकलकर इस प्रकार से सभी वर्षा की बूंदों से अलग-अलग रंग निकलकर 2° कोणीय चौड़ाई की चाप बनाते हैं, जिसे इंद्रधनुष कहा जाता है|

इंद्रधनुष देखने से क्या होता है?

स्वप्नशास्त्र के अनुसार अगर आपको सपने में इंद्रधनुष दिखाई देता है, तो यह सपना व्यक्ति के जीवन में प्रतिष्ठा लेकर आता है| इसके अलावा यह सपना नौकरी व्यवसाय में भी सफलता का प्रतीक होता है| अगर कोई व्यक्ति नयी नौकरी की खोज में है, तो बहुत जल्दी उसे नौकरी मिल जाएगी| इंद्रधनुष का सपना देखने पर व्यवसाय में काफी लाभ होता है| इसके अलावा सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए, क्योंकि सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होने का संकेत है| 

इसके अलावा स्वप्नशास्त्र के अनुसार अगर आपको सपने में एक छोर से शुरू होकर दूसरे छोर पर समाप्त होने वाली इंद्रधनुष दिखाई दे| तो यह सपना व्यक्ति के ऊंचाई पर होने के बावजूद जमीन से जुड़े होने का एक संकेत होता है| यह सपना प्रसिद्धि दिलाने के साथ-साथ रिश्तो में खुशियां लेकर आती है| 

इंद्रधनुष का इतिहास और इंद्रधनुष की खोज किसने की?

इंद्रधनुष की खोज “रने डॅकार्ट” ने की थी, जिन्होंने 1637 में पता लगाया कि इंद्रधनुष क्यों बनता है, कैसे बनता है| रने डॅकार्ट ने बताया कि सूर्य के प्रकाश का बारिश की बूंदों से गुजरने पर वर्ण विक्षेपण होने के कारण इंद्रधनुष का निर्माण होता है, जिसमें 5 रंग होते हैं| लेकिन आइज़क न्यूटन द्वारा 1966 में इंद्रधनुष के 5 रंगों में बैगनी और नारंगी रंग और जोड़ दिया गया, इस प्रकार से अब इस धनुष में कुल सात रंग पाए जाते हैं| 

चलिए हम आपको सरल भाषा में बताते हैं कि इंद्रधनुष कैसे बनता है? बरसात के मौसम में बारिश होने के बाद बरसात की कुछ बूंदे वायुमंडल में रह जाती हैं, और जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल के इन बूंदों से टकराते हुए जमीन पर आती है, तो हमें सूर्य की किरणें सात रंगों में परिवर्तित दिखाई देती है| जो पृथ्वी से देखने पर सतरंगी इंद्रधनुष जैसे दिखाई देता है| इसीलिए इंद्रधनुष हमेशा बरसात के मौसम में दिखाई देता है, सुबह के समय इंद्रधनुष पश्चिम दिशा में तथा शाम के समय में इंद्रधनुष पूर्व दिशा में दिखाई देता है| 

इंद्रधनुष के बारे में रोचक बातें

जैसा कि ऊपर हमने आर्टिकल में बताया बारिश के मौसम में सूरज की रोशनी के कारण इंद्रधनुष बनता है, लेकिन चांद की रोशनी से भी इंद्रधनुष बनता है, जिसे Moonbow के नाम से जाना जाता है| इसके अलावा कोहरे से भी इंद्रधनुष बनता है, जिसे Fogbow के नाम से जाना जाता है| आपको बता दें दो स्थानों पर खड़ा हुआ अलग अलग व्यक्ति को इंद्रधनुष भी अलग-अलग रंग का दिखाई देता है| हां ऐसा हो सकता है कि आपको लगे आप एक ही इंद्रधनुष देख रहे हो, मगर दोनों अलग-अलग रंग का इंद्रधनुष देख रहे होते हो| अगर एक साथ दो इंद्रधनुष बनते हैं, तो ऐसी स्थिति में दोनों इंद्रधनुष के रंगों का क्रम बिल्कुल विपरीत होगा|

14 मार्च 1994 में इंग्लैंड के शेफील्ड शहर में आज तक का सबसे लंबे समय तक इंद्रधनुष दिखाई दिया था| यह इंद्रधनुष सुबह 9:00 बजे से शाम 3:00 बजे तक दिखाई दिया था| सूर्य के नीचे होने पर इंद्रधनुष ऊंचाई पर दिखाई देता है, जबकि सूर्य के ऊपर होने पर इंद्रधनुष नीचे की तरफ दिखाई देता है| इंद्रधनुष के बीच के गाढ़े भाग को एलेग्जेंडर बैंड कहा जाता है, यह नाम 200 ईस्वी में एलेग्जेंडर बैंड रखा गया था| इंद्रधनुष शब्द लैटिन भाषा के arcus pluvius शब्द से लिया गया है, जिसका मतलब होता हैं “बरसात की चाप” 

IndraDhanush Kaise Banta Hai (FAQ)

1.इंद्रधनुष का बनना किसका उदाहरण है?

इंद्रधनुष का बनना परावर्तन, पूर्ण आंतरिक परावर्तन तथा अपवर्तन द्वारा वर्ण विक्षेपण का सबसे अच्छा उदाहरण हैं| 

2.इंद्रधनुष सात रंगों का क्यों होता है?

जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में बारिश की बूंदों से होकर गुजरता है, तो वर्ण विक्षेपण के कारण साथ अलग-अलग रंगों में टूट जाता है, इसी वजह से इंद्रधनुष सात रंगों का होता है| 

3.प्राथमिक इंद्रधनुष कैसे बनता है?

जब बारिश की बूंदों पर आने वाली सूर्य की किरणों का दो बारा अपवर्तन तथा एक बार परिवर्तन होता है, तो ऐसी स्थिति में प्राथमिक इंद्रधनुष बनता है| प्राथमिक इंद्रधनुष बनने पर बैगनी किरण आंख पर 40.8 डिग्री तथा लाल किरण आग पर 42.8 डिग्री का कोण बनाती है| 

4.आपको इंद्रधनुष कब दिखाई देता है?

बरसात के मौसम में इंद्रधनुष दिखाई देता है, लेकिन जब सूर्य हमारे पीठ की तरह होता है, तो हमें आगे की तरफ इंद्रधनुष बना हुआ दिखाई देता है|

5.इंद्रधनुष नाम कैसे पड़ा?

इंद्रधनुष शब्द लैटिन भाषा के “Arcus Pluvius” शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ होता है बरसात की चाप|

6.इंद्रधनुष की खोज किसने की थी?

भौतिक विज्ञानी और गणितज्ञ आइजैक न्यूटन के द्वारा 1660 की दशक में इंद्रधनुष की खोज की गई थी|

7.इंद्रधनुष के दो प्रकार क्या है?

इंद्रधनुष को दो भागों में बांटा गया है| १. प्राथमिक इंद्रधनुष २. माध्यमिक इंद्रधनुष 

8.एक बार में कितने इंद्रधनुष दिखाई दे सकते हैं?

एक बार में कई बार एक के ऊपर एक 3 इंद्रधनुष दिखाई दे सकते हैं| 

9.इंद्रधनुष कितने समय तक रहता है?

इंद्रधनुष आमतौर पर 1 घंटे से कम समय के लिए होता है, लेकिन इसकी कोई फिक्स टाइम नहीं होती है| 

10.कौन सा देश इंद्रधनुष की तरह दिखता है?

अफ्रीका महाद्वीप के देश दक्षिण अफ्रीका इंद्रधनुष की तरह दिखाई देता है|

11.हमें रात में इंद्रधनुष क्यों नहीं दिखाई देता?

जैसा कि हम जानते हैं सूरज की रोशनी के कारण इंद्रधनुष बनता है, इसलिए रात में सूरज ना होने के कारण हमें रात में इंद्रधनुष दिखाई नहीं देता है| 

12.इंद्रधनुष को कम बाद याद रखने के लिए क्या नाम दिया गया है?

इंद्रधनुष में सात रंगों को याद करने के लिए “बैजानीहपीनाला” नाम दिया गया है| बै-बैगनी, जा-जामुनी, नी-नीला, ह-हरा, पी-पीला, ना-नारंगी, ला-लाल| 

13.इंद्रधनुष का पहला रंग क्या है?

इंद्रधनुष का पहला रंग लाल होता है|

14.इंद्रधनुष के देवता कौन हैं?

इंद्रधनुष के देवता भगवान इंद्र को कहा जाता है|

15.इंद्रधनुष किस दिशा में बनता है?

सुबह के समय इंद्रधनुष पश्चिम दिशा में बनता है, जबकि शाम के समय में इंद्रधनुष पूर्व दिशा में बनता है| 

16.इंद्रधनुष किस समय दिखाई देता है?

जब सूरज आपके पीछे की तरफ हो, तभी आपको सामने की तरफ इंद्रधनुष दिखाई देता है| यही वजह है सुबह के समय सूरज पूरब की तरफ होता है तभी इंद्रधनुष पश्चिम दिशा में बनता है| और शाम के समय सूरज पश्चिम दिशा में होता है और इंद्रधनुष पूर्व दिशा में बनता है| 

निष्कर्ष

दोस्तों इस आर्टिकल में हमने IndraDhanush Kaise Banta Hai. इसके विषय में पूरी जानकारी विस्तार से बताई हुई है| इस आर्टिकल को पढ़कर आप इंद्रधनुष के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं| जैसे : इंद्रधनुष कब और कैसे बनता है, इंद्रधनुष देखने से क्या होता है, इंद्रधनुष किस समय दिखाई देता है, इंद्रधनुष किस दिशा में बनता है इसमें लाल रंग का क्या स्थान है, इंद्रधनुष में कितने रंग होते हैं, आदि जानकारी इस आर्टिकल में बताया गया है| इसके अलावा इंद्रधनुष से संबंधित अगर आपका कोई सवाल है, तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं| 

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