गांव में बकरी पालन कैसे करें, लागत और कमाई । नस्ल, बीमारी, प्रशिक्षण केंद्र

दोस्तों आज के समय में ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन व्यवसाय काफी तेजी से बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा, किसान भाई इसके अलावा पढ़े-लिखे युवा भी बकरी पालन का व्यवसाय कर रहे हैं। आज के समय में ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले व्यक्ति को अपना स्वरोजगार शुरू करने के लिए बकरी पालन का व्यवसाय अच्छा विकल्प हो सकता है। बकरी पालन व्यवसाय की बढ़ती प्रचलन को देखते हुए आज इस आर्टिकल में मैं आपको यही बताने वाला हूं कि Bakri Palan Kaise Kare, बकरी पालन शेड कैसे तैयार करें।

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Goat Farming के लिए अच्छे नस्ल के बकरी और बकरे का चुनाव कैसे करें, बकरी का रखरखाव और भोजन, बकरी पालन व्यवसाय में लगने वाली कुल लागत, बकरी पालन व्यवसाय से कमाने के तरीके, बकरी पालन से होने वाली कमाई आदि के बारे में इस आर्टिकल में पूरा विस्तार से जानेंगे। क्योंकि आज के समय में बकरी पालन व्यवसाय से अच्छी कमाई की जा सकती है।

Table of Contents

बकरी पालन व्यवसाय कौन कर सकता हैं?

Bakri Palan व्यवसाय एक ऐसा व्यवसाय है जिसे ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों दोनों स्तर पर किया जा सकता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति शहरी क्षेत्र में बकरी पालन व्यवसाय शुरू करना चाहता है, तो उसके लिए काफी मुश्किल के साथ-साथ ज्यादा लागत की जरूरत होती है। शहरी क्षेत्रों में बकरी पालन व्यवसाय उन व्यक्तियों के लिए सही है, जो शहर के स्थाई निवासी हैं।

जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन व्यवसाय काफी तेजी से बढ़ रहा है, बकरी पालन व्यवसाय शुरू करने के लिए पात्रताएं निर्धारित नहीं की गई है। बकरी पालन व्यवसाय किसान, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगार युवा, नौकरी पेशा युवा आदि यानि बकरी पालन व्यवसाय कोई भी कर सकता है। बस बकरी पालन व्यवसाय करने के लिए उसके पास जानकारी और लागत होनी चाहिए।

बकरी पालन में कितना खर्च आता हैं?

बकरी पालन व्यवसाय शुरू करने वाले व्यक्ति को बकरी पालन व्यवसाय में लगने वाली लागत के बारे में जरूर सोच लेना चाहिए। हालांकि बकरी पालन व्यवसाय आप छोटे स्तर पर कर सकते हैं, जिसमें कम लागत की जरूरत होती है। जैसे : बकरी पालन का व्यवसाय 2-4 बकरी से कर सकते हैं, और धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ा सकते हैं।

अगर आप जैसे 5 बकरी से बकरी पालन व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो ऐसी स्थिति में 1 बकरी की कीमत 5000 तो 5 बकरी की कीमत 25000 आपके पास होनी चाहिए। अगर आप बड़े स्तर पर बकरी पालन व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो राज्य सरकार अपने-अपने राज्य के नागरिकों के लिए बकरी पालन योजना शुरू की हुई है। जैसे उत्तर प्रदेश बकरी पालन योजना बिहार बकरी पालन योजना आदि।

इस Bakri Palan Yojana के अंतर्गत आप बड़ी आसानी से बकरी पालन का व्यवसाय बड़े स्तर पर शुरू कर सकते हैं। क्योंकि बकरी पालन व्यवसाय में होने वाले कुल खर्च का लगभग 60 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल जाती है। सामान्य वर्ग के लिए 50% सब्सिडी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए 60% तक सब्सिडी, बकरी पालन योजना के अंतर्गत दी जाती है। इसके बाद बकरी पालन लोन नाबार्ड से बकरी लोन ले सकते हैं।

इस प्रकार आप Bakri Palan Yojana के नियम और शर्तों को पूरा करके इस योजना का लाभ उठा सकते हैं और बहुत कम लागत में बकरी पालन व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा इस योजना के अंतर्गत बकरी पालन व्यवसाय प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकते हैं।

बकरी पालन शेड बनाने का तरीका

ऊपर आपने समझा कि बकरी पालन व्यवसाय कौन शुरू कर सकता है और बकरी पालन व्यवसाय करने के लिए कितनी लागत की जरूरत होती है। अब हम जानेंगे कि बकरी पालन करने के लिए बकरी पालन शेड कैसे तैयार किया जाता है। क्योंकि बकरी पालन व्यवसाय में बकरी पालन शेड की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, अगर आप 20 बकरी से बकरी पालन व्यवसाय शुरू करते हैं, तो 20 बकरी के लिए शेड तैयार करने में कम से कम 400 वर्ग फीट जगह की जरूरत पड़ती है।

इसके अलावा बकरी पालन शेड तैयार करते समय बकरियों के 3 महीने के बच्चे, 6 महीने के बच्चे को रखने के लिए अलग से जगह की जरूरत होती है। हालांकि बकरी पालन के लिए तैयार किया गया शेड में आप लकड़ी का घेरा बनाकर बकरियों के बच्चे को उम्र के हिसाब से अलग अलग रख सकते हैं। बकरी और बकरी के बच्चे को रखने के लिए अलग-अलग इस प्रकार से शेड तैयार कर सकते हैं।

बकरी के छोटे बच्चों को रहने की जगह तैयार करना

बकरी के बच्चे अगर 3 महीने या 3 महीने से कम है तो उनके लिए कम से कम 4 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत पड़ती है। जबकि 3 से 6 महीने वाले बकरी के बच्चों को रहने के लिए कम से कम 8 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है। 6 से 12 महीने वाले बकरी के बच्चों के लिए 10 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है।

बकरियों के रहने के लिए जगह तैयार करना

बकरियों के रहने के लिए शेड तैयार करते समय एडल्ट बकरी और प्रेग्नेंट बकरी के हिसाब से शेड तैयार करनी चाहिए। एडल्ट बकरी के लिए कम से कम 12 से 16 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है। प्रेग्नेंट बकरी के लिए 18 से 20 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है। ब्रिटनी बक, बकरा को 22 से 25 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है।

बकरी पालन व्यवसाय शुरू करने के लिए शेड ऐसी जगह पर तैयार करनी चाहिए, जहां पर पानी की उत्तम व्यवस्था हो। इसके अलावा बकरी को चलाने के लिए शेड के बगल में हरी हरी घास की व्यवस्था होनी चाहिए। बकरी पालन व्यवसाय गांव में ना करके गांव से थोड़ी दूरी पर करनी चाहिएI जैसे : खेत में घर बना कर वहीं पर बकरी पालन शेड बनाकर बकरी पालन व्यवसाय करना चाहिए, जहां पर बकरी का रखरखाव खानपान का ध्यान अच्छे से रख सकते हैं।

बकरी पालन शेड बनाते समय उस जगह को किनारे किनारे लोहे की जंजीर अथवा लकड़ी से अच्छे तरीके से घेराव कर देना चाहिए। और उस पर बारीक जारी लगा देनी चाहिए, ताकि बकरियों को मच्छर और मक्खी ना लग सके। इसके अलावा हवा पासिंग, बकरियों को गर्मी न लगे, बकरियों के मल मूत्र निकलने की व्यवस्था, आदि को ध्यान में रखते हुए बकरी पालन शेड तैयार करनी चाहिए।

बकरियों की नस्ल का चुनाव

बकरी पालन व्यवसाय शुरू करने के लिए अपने बजट और जलवायु के आधार पर बकरियों के अच्छी नस्ल का चुनाव करना चाहिए। ताकि बकरी को उस जलवायु और जगह के हिसाब से रहने में कोई परेशानी ना हो। यहां पर हम आपको 5 नस्ल की बकरियों के बारे में बताने वाला हूं। जैसे : 

1.चांगथांगी या लद्दाख पश्मीना नस्ल की बकरी

इस नस्ल की बकरियां अधिकांश करके कश्मीर में पाई जाती हैं| इन बकरियों को अधिकांश करके खानाबदोश समुदायों द्वारा पाला जाता है। चांगपा समुदाय द्वारा उत्तरी भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर में इन बकरियों का पालन काफी ज्यादा होता है। इस नस्ल की बकरियों से पश्मीना शाल बनाए जाते हैं, जो कि कश्मीर की प्रसिद्ध साल मानी जाती है। इसलिए अगर आप जम्मू कश्मीर जैसे राज्य के रहने वाले हैं, तो वहां पर चांगथांगी या लद्दाख पश्मीना नस्ल की बकरियों से अपना बकरी पालन व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

2.चिगू नस्ल की बकरी

उत्तर प्रदेश के उत्तर में और भारत में हिमाचल प्रदेश के उत्तर पूर्व में अधिकांश करके चिगू नस्ल की बकरियां पाई जाती हैं। चीगू नस्ल की बकरियों के लिए यहां का मौसम और जगह काफी उपयुक्त होता है। चीगू नस्ल के बकरे के शरीर का वजन 40 किलोग्राम तक होता है, जबकी मादा बकरी के शरीर का वजन 25 किलोग्राम होता हैं। इसलिए अगर आप उत्तर प्रदेश के उत्तर में और भारत में हिमाचल प्रदेश के उत्तर पूर्व के रहने वाले हैं, तो आप चिगू नस्ल की बकरियों से अपना Goat Farming व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

3.मालाबारी नस्ल की बकरी

केरल जैसे राज्यों में मालाबारी नस्ल की बकरियां पाली जाती है, जिनका उपयोग ज्यादातर मास और दूध के लिए किया जाता है। मालाबारी नस्ल की बकरियों का वजन औसतन 68 किलोग्राम होता है, जबकि बकरों का वजन 41.20 किलोग्राम होता हैं। मारबारी नस्ल की बकरियों का कान और पैर छोटे छोटे होते हैं जबकि शरीर का वजन काफी ज्यादा होता है। अगर आप केरल जैसे राज्यों में बकरी पालन व्यवसाय करना चाहते हैं, तो आप मारबारी नस्ल की बकरी से बकरी पालन व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

4.सुरती नस्ल की बकरी 

भारत में घरेलू बकरियों के लिए ज्यादातर सुरती नस्ल की बकरी पाली जाती है। क्योंकि सुरती नस्ल की बकरियों से मुख्य रूप से दूध उत्पादन किया जाता है।

5.सिरोही नस्ल की बकरी

इस नस्ल की बकरियों को खासकर मीट उत्पादन के लिए पाला जाता है। हालांकि सिरोही नस्ल की बकरियां आधा लीटर से 700 ML दूध भी देती हैं। सिरोही नस्ल की बकरियां बहुत तेजी से बढ़ती हैं, इसके अलावा गर्म मौसम को आराम से झेल सकती हैं। सिरोही नस्ल की बकरी का वजन औसतन 33 किलोग्राम होता है, जबकि बकरे का वजन 30 किलोग्राम होता है।

सिरोही नस्ल की बकरियां 18 से 20 महीने की उम्र के बाद बच्चे देना शुरू कर देती हैं, और 1 साल में दो बार बच्चों को जन्म देती ह। राजस्थान के लोकल मार्केट यानी सिरोही जिले में सिरोही नस्ल की बकरियां पाई जाती हैं। अगर आप राजस्थान के रहने वाले हैं, तो सिरोही बकरी पालन से बकरी पालन व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

  • गददी नस्ल की बकरी
  • आसाम हिल्स नस्ल की बकरी
  • मारवाड़ी नस्ल की बकरी
  • ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरी
  • जखराना नस्ल की बकरी
  • उस्मानाबादी नस्ल की बकरी
  • बीटल नस्ल की बकरी
  • संगमनेरी नस्ल की बकरी
  • जमुनापारी नस्ल की बकरी
  • मेहसाणा नस्ल की बकरी

ऊपर जो भी लिस्ट दी गई है इन सभी बकरियों की नस्ल भारत में पाई जाती है। अगर आप भी अपने गांव में या शहर में बकरी पालन शुरू करना चाहते हैं, तो इनमें से अपने अनुसार बकरी के नस्ल का चुनाव कर सकते हैं। अपने क्षेत्र की जलवायु को ध्यान में रखते हुए बकरियों की नस्ल का चुनाव करें ताकि बकरी उस जगह पर आराम से रह सके, उसे कोई परेशान न हों।

बकरी पालन चारा व्यवस्थापन

बकरी पालन करने से पहले आपको यह अवश्य जानना चाहिए कि बकरी को खाने में क्या क्या देना चाहिए। बकरियों को खाने के लिए आप हरी घास, आम की पत्तियां, खेतों से निकलने वाले फसल, अरहर, सरसों, चना की भूसी, गेहूं का भूसा, महुआ की पत्ती आदि दे सकते हैं। इसके अलावा सुबह शाम अगर संभव हो, तो बकरी को खुले मैदान में हरी घास चराने ले जाना चाहिए, जिससे बकरियां पेट भर के भोजन कर लेती हैं, और उनका शरीर स्वस्थ रहता है।

इसके अलावा बकरियों का वजन बढ़ाने के लिए गेहूं का भूसा बहुत ही अच्छा माना जाता है। गेहूं के भूसे में हल्का पानी मिलाने के बाद गेहूं के आटे/चना आदि को मिलाकर बकरियों को खिलाना चाहिए। ऐसा भोजन बकरियां पेट भर के खाती हैं और इनका वजन धीरे-धीरे बढ़ जाता है। बकरियों के वजन बढ़ने से जब आप बकरी को बाजार में बेचते हैं, तो आपको काफी अच्छा पैसा मिलता है। इसके अलावा नीचे सारणी में बकरियों को चारा खिलाने से संबंधित जानकारी और विस्तार से दी गई है-

  • बकरियों को खाने के रूप में भूसा के साथ अनाज के दाने मिलकर खिलाना चाहिए।
  • अगर आपके पास समय है तो सुबह शाम बकरियों को खेत में बगीचे में घास चराने के लिए लेकर जाना चाहिए। जिससे उनको हरी घास मिलेगी, इसके अलावा शरीर भी स्वस्थ रहेगा।
  • बकरियों का वजन बढ़ाने के लिए कभी भी उन्हें ज्यादा मात्रा में अनाज नहीं खिलाना चाहिए।
  • अगर बकरियों की पाचन क्षमता सही नहीं है, तो बकरी के चारे में पाचन चूर्ण का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • बकरियों को भोजन के साथ-साथ पानी की व्यवस्था जरूर करनी चाहिए, तथा भूसा, पानी और अनाज एक में मिलाकर बकरी को खिलाना चाहिए।

बकरी का वजन कैसे बढ़ाएं?

दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं अधिकांश करके गांव में देसी बकरियों की कीमत काफी ज्यादा होती है। और यह कीमत बकरियों के वजन पर निर्भर करता है, यानि बकरी का वजन जितना होगा, उसी अनुसार बकरी की कीमत लगाई जाती है। इसलिए बकरी पालन करने वाले व्यापारी हमेशा बकरियों का वजन बढ़ाने में लगे रहते हैं।

अगर आप भी बकरी पालन व्यवसाय कर रहे हैं, तो अपनी बकरियों का वजन बढ़ाने के लिए उन्हें समय-समय पर सूखे चारा के साथ गेहूं का भूसा में हल्का पानी मिलाकर गेहूं के आटे, चोकर,या चने/अरहर की भूसी मिलाकर खिलाना चाहिए। इससे बकरियों का वजन बढ़ जाता है, जिसे बेचकर आप अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।

बकरी का प्रजनन प्रबंधन कैसे करें?

बकरी का प्रजनन प्रबंधन कराते समय यह ध्यान देना चाहिए, बकरी और बकरे की नस्लें समान होनी चाहिए। नर बकरों की उम्र 1.5 साल से 2 साल होनी चाहिए, इसके अलावा एक बकरे से प्रजनित संतान को उसी से प्रजनन नहीं करवाए। क्योंकि ऐसा होने से आनुवंशिक विकृतियां पैदा हो जाती है।बकरियों में गर्मी चढ़ने पर 12 के बाद ही उसे बकरे के पास ले जाना चाहिए। और 20-30 बकरी के प्रजनन के लिए एक बकरे को रखें।

बकरी एक बार गर्भवती हो जाने पर वह 6-7 माह बाद बच्चे को जन्म देती है। एक बार में कम से कम 2-3 बच्चे को जन्म देती है। बकरी पालन शुरू करके आप बहुत कम समय में बकरियों की संख्या बढ़ा सकते हैं।

बकरी पालन से संबंधित प्रशिक्षण केंद्र

जैसा कि हमने ऊपर आर्टिकल में बताया कि राज्य सरकार बकरी पालन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बकरी पालन योजना शुरू की है। इसके अलावा बकरी पालन के लिए प्रशिक्षण केंद्र भी बनाए हुए हैं, जहां पर कोई भी व्यक्ति बकरी पालन प्रशिक्षण लेकर या बकरी पालन की किताब से प्रशिक्षण लेकर अपना बकरी पालन व्यवसाय शुरू कर सकता है। उत्तर प्रदेश के मथुरा में भी केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान बनाई गई है।

यह संस्थान कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग कृषि मंत्रालय भारत सरकार के अधीनस्थ काम करता है। इस संस्था द्वारा किसानों, बेरोजगार युवाओं और छोटे उद्यमियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बकरी पालन प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। बकरी पालन प्रशिक्षण केंद्र से संबंधित अधिक जानकारी पाने के लिए आप इस संस्थान की ऑफिशियल वेबसाइट cirg.res.in या हेल्पलाइन नंबर 0565-2763320 पर संपर्क कर सकते हैं।

संस्थान का पूरा पता : केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान मखदूम पोस्ट – फरह, 281122 जिला मथुरा (उत्तर प्रदेश) 

बकरियों का टीकाकरण (Goat Vaccination)

अगर आप बकरी पालन करते हैं तो बकरियों की सेहत पर विशेष ध्यान रखें, उन्हें समय समय पर टीकाकरण और डीवार्मिग करवाते रहना चाहिए। जैसे: पैर और मुंह के रोग के लिए FMD, गोट प्लग से संबंधित रोग के लिए PPR, हेमोरेगिक, गोट पोक्स से संबंधित टीकाकरण और डी वार्मिंग समय-समय पर करवाते रहना चाहिए।

समय-समय पर बकरियों का टीकाकरण करने से उनका स्वास्थ्य अच्छा होगा, उनके ऊपर बीमारियों के लिए पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

बकरियां में होने वाली बीमारियां

दोस्तों अगर आप बकरी पालन करना चाहते हैं, तो आपको बकरियां में होने वाली बीमारी के बारे में पता होना चाहिए। नीचे हमने कुछ बीमारियों की लिस्ट दी है, जो अक्सर बकरियों को हो जाती हैं।

दस्त की बीमारी

जब बकरी को दस्त की बीमारी हो जाती है तो बकरी दिन में कई बार तरल रुप में यानि पानी जैसा मल करती है। अगर आप बकरी के इस बीमारी पर ध्यान नहीं देंगे, तो धीरे धीरे बकरी का शरीर कमजोर होने लगता है। दस्त की बीमारी के उपचार के लिए 20 ग्राम नेबलोन पाउडर खिलाना चाहिए, अगर इससे ठीक नहीं हुआ तो नजदीकी डाक्टर से संपर्क करना चाहिए।

खुरपका/मुंहपका की बीमारी

इस बीमारी के अंतर्गत बकरियों के पैर में छाले पड़ जाते हैं, इसके अलावा बकरियों के मुंह में भी छाले पड़ जाते हैं। छाले पड़ जाने के कारण बकरी को खाने और चलने में परेशानी होती है। अगर आप समय पर इसका उपचार नहीं करते हैं, तो बकरी धीरे-धीरे कमजोर होती चली जाती है।

इसके उपचार के लिए आप बकरी के पैरों को डिटाल से धो सकते हैं। तथा लोरेक्सन लगा सकते हैं। इसके अलावा अपने गांव के अन्य बकरी पालन व्यवसायी से संपर्क कर सकते हैं या डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

आफरा की बीमारी

इस बीमारी के अंतर्गत बकरियों का पेट फूल जाना, पेट में ज्यादा दर्द होना, सांस लेने में तकलीफ होना, जुगाली ना करना आदि लक्षण दिखाई देते हैं। इसके उपचार के लिए आप बकरियों के खाने में 10 से 20 ग्राम सोडा खिला सकते हैं। अगर फिर भी बकरी की बीमारी ठीक नहीं होती है, तो अपने नजदीकी पशु डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

निमोनिया या जुकाम की बीमारी

सर्दियों के मौसम में अधिकांश करके बकरियों को निमोनिया होती जाता है। बकरियों के नाक बहना, खांसना, बार-बार छीकना, मुंह खोलकर सांस लेना आदि ये सब जुकाम के लक्षण है। अगर आप इस पर ध्यान नहीं देंगे तो धीरे-धीरे यह निमोनिया का रूप ले लेती है। बकरियों को निमोनिया जैसी बीमारी के उपचार के लिए एंटीबायोटिक 3-5 ml 5 दिन तक पिला सकते हैं। अगर कुछ फर्क नहीं दिखाई दिया तो नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बकरी व्यवसाय से होने वाली कमाई

बकरी पालन से कमाई काफी मोटी की जा सकती है, क्योंकि बकरी 2 साल में तीन बार बच्चों को जन्म देती है, इसलिए आप बकरी के बच्चों को बेचकर अच्छा पैसा कमा सकते हैं।  इसके अलावा दूध देने वाली बकरियों के दूध बेचकर अच्छा पैसा कमा सकते हैं। बकरियों के मांस बेचकर अच्छा पैसा कमा सकते है।

इसके अलावा बकरियों की मल मूत्र बेचकर अच्छा पैसा कमा सकते हैं, क्योंकि बकरियों के मल मूत्र खेत के लिए काफी उर्वरक खाद माना जाता है। इस प्रकार से Bakri Palan Bussniss में कमाने की कई रास्ते उपलब्ध होते हैं। आप बकरी पालन व्यवसाय शुरू करके व्यवसाय को बढ़ाकर इन सभी रास्तों से काफी मोटा पैसा कमा सकते हैं।

बकरी पालन का लाभ

ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन द्वारा कोई भी व्यक्ति अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकता है, और मोटी कमाई कर सकता है। क्योंकि बकरी पालन के निम्नलिखित लाभ होते हैं, जो इस प्रकार से हैं-

  • गाय भैंस यानी पशुपालन की अपेक्षा बकरी पालन व्यवसाय में कम जगह की जरूरत होती है। 
  • अगर आपके पास कम जगह हैं, तो आप बहुत कम जगह में भी छोटे स्तर पर बकरी पालन उद्योग बड़ी आसानी से शुरू कर सकते हैं। 
  • पशुपालन की अपेक्षा बकरी पालन व्यवसाय में बहुत कम भोजन की जरूरत पड़ती है, जिसका प्रबंध आप आसानी से कर सकते हैं।
  • बकरी पालन व्यवसाय में बकरी 2 साल में लगभग 3 बार बच्चे को जन्म देती है, इस हिसाब से बहुत कम समय में बकरियों की संख्या बढ़ जाती है।
  • आजकल मुर्गियों में कई प्रकार की बीमारी पाई जा रही है, जिसके कारण मुर्गी की बिक्री या बाजार भाव कम होता जा रहा है| ऐसी स्थिति में बकरी पालन का व्यवसाय ज्यादा अच्छा है। 
  • बकरी का दूध डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी में, पाचन क्षमता में बच्चों और वयस्कों के लिए अच्छा माना जाता है। जबकि बकरी का मांस प्रोटीन और आयरन की मात्रा ज्यादा पाई जाती है। यही वजह है बकरी का दूध और मांस काफी महंगा बिकता है। इसलिए बकरी पालन व्यवसाय करके अच्छी कमाई की जा सकती है।
  • बकरी के दूध और मांस के अलावा बकरी के बच्चे को बेचकर भी काफी अच्छा पैसा कमाया जा सकता है।
  • बकरी पालन व्यवसाय शिक्षित, अशिक्षित, किसान, नौकरी पेशा युवक, बेरोजगारी युवा, यानि कोई भी कर सकता है।
  • बकरी पालन व्यवसाय के लिए किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं पड़ती है, हालांकि बकरी पालन व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।

FAQs

1. 10 बकरी पालने में कितना खर्चा आएगा?

अगर आप देसी स्थानीय नस्ल की बकरियां जैसे : जमुनापारी, बारबरी, सिरोही, बीटल आदि नस्ल की 10 बकरियां पालते हैं, तो आपका लगभग ₹75000 का खर्च आएगा।

2. 50 बकरी के लिए कितनी जगह चाहिए?

एक बकरी के लिए औसतन 20 वर्ग फीट की जगह होनी चाहिए, इस हिसाब से 50 बकरी के लिए 1000 वर्ग फीट की जगह होनी चाहिए।

3. कम खर्च में बकरी पालन कैसे करें?

आप ग्रामीण क्षेत्रों में कम खर्च में बकरी पालन कर सकते हैं, इसके लिए अपने घर के पीछे या बगीचे में खाली जगह से 2-4 बकरी से बकरी पालन व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। बकरियां 2 साल में 3 बार बच्चे को जन्म देती हैं, इसलिए 2 साल तक जाते जाते बकरियों की संख्या बढ़ सकती हैं।

4. 100 बकरी के लिए कितनी जगह चाहिए?

एक बकरी के लिए औसतन 20 वर्ग फीट की जगह होनी चाहिए, इस हिसाब से 100 बकरी पालन के लिए 2000 वर्ग फीट की जगह होनी चाहिए।

5. 20 बकरी के लिए कितनी जगह चाहिए?

एक बकरी के लिए औसतन 20 वर्ग फीट की जगह होनी चाहिए, इस हिसाब से 20 बकरी के लिए 400 वर्ग फीट की जगह होनी चाहिए।

6. 10 बकरी पर कितना लोन मिलेगा?

ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन व्यवसाय करने वाले व्यक्ति को सरकार द्वारा बकरी पालन लोन प्रदान किया जाता है। बकरी पालन लोन के अंतर्गत 10 बकरी पर 4 लाख तक लोन ले सकते हैं।

7. क्या मैं अपने पिछवाड़े में बकरी पाल सकता हूं?

जी हां, आप अपने घर के पिछवाड़े से 2-3 बकरियों से बकरी पालन व्यवसाय शुरू कर सकते हैं, और बजट होने पर धीरे धीरे बकरी पालन व्यवसाय को बढ़ा सकते हैं।

8. 2 बकरियों को कितनी जगह चाहिए?

एक बकरी के लिए औसतन 20 वर्ग फीट की जगह होनी चाहिए, इस हिसाब से 2 बकरी पालन के लिए 40 वर्ग फीट की जगह होनी चाहिए।

9. एक बकरी कितने बच्चे दे सकते हैं?

एक बकरी एक बार में 3-5 बच्चे को जन्म देती हैं।

10. बकरियों को क्या-क्या खिलाना चाहिए?

बकरियों को हरी घास, आटे की चौकर, चना, भूसा, पेड़ के पत्ते आदि खिलाना चाहिए।

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